Sunday, April 29, 2007

भगवान् के खिलाफ

भगवान् के खिलाफ लिखने पर मुझे उम्मीद थी कि कोई तो प्रतिक्रिया होगी। लोग इस मुद्दे पर चर्चा करने पर आगे आएंगे। लेकिन लगता है, ये युग ऐसी बातों को मानने वालों का है, जो वास्तव में हैं ही नहीं। खैर उम्मीद है कि कुछ लोग तो इस ब्लोग को पढ़ रहे होंगे। अगर वो चाहते हैं कि इन मुद्दों पर बहस की जाये तो आगे आयें। धन्यवाद्।

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